राजस्थान / कोटा की कई कॉलोनियों में 10 फीट तक मकान डूबे, प्रदेश के 5 बांध ओवरफ्लो; 5 जिलों में बाढ़

जयपुर. राजस्थान में भारी बारिश का दौर जारी है। यहां नदी-नाले उफान पर हैं। राज्य के 5 बड़े बांध कोटा बैराज, राणाप्रताप सागर, जवाहर सागर और माही बजाज के सभी गेट खोलने पड़े हैं। बीसलपुर बांध के भी 18 में से पहली बार 17 गेट खोले गए। कोटा, बारां, बूंदी, चित्तौड़गढ, झालावाड़ में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। यहां सेना-एनडीआरएफ ने मोर्चा संभाला। बारां, झालावाड़ में सोमवार को स्कूल बंद रहेंगे। जयपुर में सोमवार को करीब सवा दो इंच बारिश हुई।


कोटा: कोटा में पानी चंबल नदी से करीब 100 फीट ऊपर बने मकानों की तरफ बढ़ रहा है। शहर के कई इलाकों में पानी 8 से 10 फीट तक पहुंच गया है। प्रशासन का कहना है कि सोमवार को भी बाढ़ के हालात बने रहेंगे। उधर, चंबल के पास संजय कॉलोनी में पानी बढ़ने पर एक परिवार के दो मासूम फंस गए। कांस्टेबल राकेश मीणा ट्‌यूब के सहारे 7-8 फीट गहरे पानी में कूदे और दोनों को सुरक्षित निकाल लिया।


चित्तौड़गढ़ : चित्तौड़गढ़ का बेगूं कस्बा टापू बना है। कस्बे के सभी मार्ग बंद हो गए हैं। बेगूं में इस सीजन में 1747 मिमी बारिश हो चुकी है। इतनी बारिश गत 50 साल में भी नहीं हुई। चित्तौड़गढ़ के मऊपुरा आदर्श विद्या मंदिर स्कूल के 350 बच्चे और 50 शिक्षक-स्टाफ शनिवार से फंसे हुए हैं। उन्हें स्थानीय लोग भोजन-पानी मुहैया करा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि वे सुरक्षित हैं। एनडीआरएफ की टीम उन्हें निकालेगी।
बूंदी : बूंदी के बसोली में गुढ़ा बांध के रविवार को 4 गेट 6 फीट तक खोले गए। 12 गांवों में हाईअलर्ट है।
झालावाड़ : झालावाड़ के चौमहला, गंगधार, रायपुर क्षेत्र में घरों में पानी भरा। सेना के 70 जवानों ने चौमहला क्षेत्र में मोर्चा संभाला।
बारां : बारां में पार्वती, कालीसिंध और परवन नदी के उफान पर रहने से कई कस्बों से संपर्क कटा। पलायथा और सीसवाली कस्बे की निचली बस्तियों में पानी घुसा। प्रशासन ने घर छोड़ने को कहा।


 



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सवाल / दो बाघिनों की मौत अचानक नहीं हुई, कई महीनों से बीमार थीं, लापरवाहों ने जान ली
सवाई माधोपुर. रणथंभौर में इलाके (टेरेटरी) को लेकर बाघों का ‘रण’थम नहीं रहा। सोमवार सुबह दो बाघ टी-57 और टी-58 भिड़ गए। काफी देर तक हुए मुकाबले में दोनों बाघ घायल हो गए और फिर पीछे हट गए। हालांकि, दावा यह भी किया जा रहा है कि बाघिन नूर टी-39 को लेकर दोनों बाघ भिड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की की उम्र लगभग 9 साल है, ऐसे में यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं मानी जा सकती है। विभाग के अधिकारी दोनों बाघों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। अधिपत्य को लेकर 4 बार बाघ आमने-सामने आ चुके हैं रणथंभौर में इस साल 10 माह में इलाके पर अधिपत्य को लेकर 4 बार बाघ आमने-सामने आ चुके हैं। इन संघर्ष में दो बाघ की मौत हो चुकी है। जबकि तीन घायल हुए। सोमवार को हुआ यह संघर्ष सोलेश्वर महादेव के पास हुआ। यह एरिया जोन नंबर 6 में आता है और यह बाघ टी-57 का इलाका है। बाघ टी-58 का इलाका जोन नंबर 7 व 8 है। इलाके में घुसपैठ के कारण यह टकराव हुआ: वन अधिकारी एसीएफ संजीव शर्मा ने बताया कि दोनों बाघों का इलाका एकदम अलग है। सामान्य रूप से ये एक दूसरे के इलाके में नहीं जाते हैं, लेकिन एक-दूसरे के इलाके में घुसपैठ के कारण यह टकराव हुआ। इस प्रकार की घटना बाघों एवं रणथंभौर की दुनिया में आम बात है। सुबह की पारी में पर्यटक को वन भ्रमण पर ले जाया गया तो ये दोनों बाघ लड़ते हुए दिखाई दिए।
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