जयपुर. पिछले महीने बायोलॉजिकल पार्क में एक के बाद एक मरी दो बाघिनों की मौत का कारण 'केनाइन डिस्टेंपर' (सीडीवी यानी गुजरात में शेरों को होने वाली बीमारी) नहीं था। सालभर की गोल्डन टाइग्रेस किडनी फेल होने की वजह से और सफेद बाघिन सेप्टीसिमिया के कारण तिल-तिल कर मरीं। आईवीआरआई बरेली की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
अब किडनी फैलियर किस वजह से हुआ, इसकी तहकीकात नहीं हो पाई है, लेकिन पूरे एपिसोड में डॉक्टर और स्टाफ के ऑब्जरवेशन की कमी जरूर साफ हो गई है। क्योंकि ये बीमारी कोई अचानक नहीं हुई होगी और बीमारी के चलते खाना-पीना भी प्रभावित हुआ होगा। इसके बावजूद इनको समय रहते नहीं संभाला गया। इसके बावजूद विभाग का जीव अब मौत के जिम्मेदारों को बचाने में लगा है। यह उससे बड़ी लापरवाही है, जो कि भविष्य में ऐसा करने वालों को शह देगा। भास्कर ने पहले ही इस लापरवाही के बारे में बता दिया था।
सीसीएफ जांच 20 दिन में भी पूरी नहीं हो पाई, सवाल-किसे बचा रहे
शेरनी सुजैन की मौत के तीसरे दिन बाघिन रिद्धी की मौत के बाद चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरिंदम तोमर ने संबंधित सीसीएफ के.सी. मीणा को जांच सौंपी थी। यह जांच अभी 20 दिन में नहीं हो पाई है। अब आईवीआरआई बरेली की रिपोर्ट आने से लापरवाही का खुलासा होगा। इसके लिए सीसीएफ ने रिकॉर्ड मांग लिया है। इसमें फूड, रुटीन चैकअप आदि की डिटेल शामिल है। दरअसल जानवरों की जांच और फूड पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं।